आचार्य श्री १०८ शांतिसागर जी महाराज (छाणी - उत्तर) [1888]
संक्षेप (परिचय एवं ऐतिहासिक महत्व)
दिगम्बर रूप में दीक्षा ग्रहण करना त्याग एवं संयम की पराकाष्ठा है। बीसवीं शताब्दी में विशेष रूप से उत्तर भारत में जैन मुनि परम्परा प्रायः लुप्तप्राय हो चुकी थी। शास्त्रों में वर्णित दिगम्बर मुनियों के स्वरूप के दर्शन करना असम्भव प्रतीत होने लगा था।
इस असम्भव कार्य को तीन महान आचार्यों ने सम्भव कर दिखाया:
- आचार्य श्री १०८ आदिसागर जी महाराज (अंकलीकर)
- आचार्य श्री १०८ शांतिसागर जी महाराज (चारित्र चक्रवर्ती - दक्षिण)
- आचार्य श्री १०८ शांतिसागर जी महाराज (छाणी - उत्तर)
इनमें दो महान सूर्यों—आचार्य श्री शांतिसागर (चारित्र चक्रवर्ती) और आचार्य श्री शांतिसागर (छाणी) का उदय समकालीन (एक साथ) हुआ, जिससे आज हमें इस पावन परम्परा के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
संघ एवं गुरु परम्परा (मुख्य आचार्य मण्डल)
मुनि / आचार्य दीक्षित शिष्य मण्डल (कुल ५१ शिष्य)
| क्र. सं. | नाम (उपाधि सहित) | सम्बद्ध क्षेत्र / विवरण |
|---|---|---|
| १ | श्री १०८ शान्तिसागर जी महाराज | आरा |
| २ | श्री १०८ वर्धमानसागर जी महाराज | — |
| ३ | श्री १०८ संभवसागर जी महाराज | — |
| ४ | श्री १०८ पार्श्वसागर जी महाराज | अहमदाबाद |
| ५ | श्री १०८ श्रेयांससागर जी महाराज | नागपुर |
| ६ | श्री १०८ सुपार्श्वसागर जी महाराज | सम्मेद शिखर जी |
| ७ | श्री १०८ समाधिसागर जी महाराज | बोम्बे वाले |
| ८ | श्री १०८ समाधिसागर जी महाराज | — |
| ९ | श्री १०८ चन्द्रसागर जी महाराज | बयाना |
| १० | श्री १०८ श्रुतसागर जी महाराज | दिल्ली |
| ११ | श्री १०८ विजयसागर जी महाराज | सोनागिरि |
| १२ | श्री १०८ मुक्तिसागर जी महाराज | सोनागिरि |
| १३ | श्री १०८ समाधिसागर जी महाराज | सम्मेद शिखर जी (एम.पी. वाले) |
| १४ | श्री १०८ सन्मतिसागर जी महाराज | सोनागिरि |
| १५ | श्री १०८ जम्बूसागर जी महाराज | भिण्ड |
| १६ | श्री १०८ मल्लिसागर जी महाराज | सोनागिरि |
| १७ | श्री १०८ आदिसागर जी महाराज | खतौली (मुजफ्फरनगर) |
| १८ | श्री १०८ शीतलसागर जी महाराज | — |
| १९ | श्री १०८ सिद्धसागर जी महाराज | — |
| २० | श्री १०८ गुणसागर जी महाराज | सोनागिरि |
| २१ | श्री १०८ कुन्थुसागर जी महाराज | फिरोजाबाद |
| २२ | श्री १०८ निर्वाणसागर जी महाराज | श्री सम्मेद शिखर जी |
| २३ | श्री १०८ सुव्रतसागर जी महाराज | सोनागिरि |
| २४ | श्री १०८ महेन्द्रसागर जी महाराज | द्रोणागिरि |
| २५ | श्री १०८ योगसागर जी महाराज | श्री सम्मेद शिखर जी |
| २६ | श्री १०८ संयमसागर जी महाराज | श्री सम्मेद शिखर जी |
| २७ | श्री १०८ समाधिसागर जी महाराज | — |
| २८ | आचार्य श्री १०८ सन्मतिसागर जी महाराज | आचार्य पद |
| २९ | आचार्य श्री १०८ भरतसागर जी महाराज | आचार्य पद |
| ३० | आचार्य श्री १०८ अजितसागर जी महाराज | आचार्य पद |
| ३१ | उपाध्याय श्री १०८ ज्ञानसागर जी महाराज | उपाध्याय पद |
| ३२ | एलाचार्य श्री १०८ शान्तिसागर जी महाराज | एलाचार्य पद |
| ३३ | एलाचार्य श्री १०८ नेमिसागर जी महाराज | एलाचार्य पद |
| ३४ | बालाचार्य श्री १०८ विवेकसागर जी महाराज | बालाचार्य पद |
| ३५ | मुनि श्री १०८ संभवसागर जी महाराज | मुनि पद |
| ३६ | मुनि श्री १०८ बाहुबलीसागर जी महाराज | मुनि पद |
| ३७ | मुनि श्री १०८ समतासागर जी महाराज | मुनि पद |
| ३८ | मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज | मुनि पद |
| ३९ | मुनि श्री सन्तोषसागर जी महाराज | मुनि पद |
| ४० | मुनि श्री शीतलसागर जी महाराज | मुनि पद |
| ४१ | मुनि श्री वैराग्यसागर जी महाराज | मुनि पद |
| ४२ | मुनि श्री वीरसागर जी महाराज | मुनि पद |
| ४३ | मुनि श्री विनयसागर जी महाराज | मुनि पद |
| ४४ | मुनि श्री शान्तिसागर जी महाराज | मुनि पद |
| ४५ | मुनि श्री कैलाशसागर जी महाराज | मुनि पद |
| ४६ | मुनि श्री निर्वाणसागर जी महाराज | मुनि पद |
| ४७ | मुनि श्री संवेगसागर जी महाराज | मुनि पद |
| ४८ | मुनि श्री शिवसागर जी महाराज | मुनि पद |
| ४९ | मुनि श्री तीर्थसागर जी महाराज | मुनि पद |
| ५० | मुनि श्री भव्यसागर जी महाराज | मुनि पद |
| ५१ | मुनि श्री पदमसागर जी महाराज | मुनि पद |
ऐलक दीक्षा प्राप्त शिष्य (कुल १० शिष्य)
क्षुल्लक दीक्षा प्राप्त शिष्य (कुल ३२ शिष्य)
क्षुल्लिका एवं आर्यिका शिष्य परम्परा
आचार्य श्री शांतिसागर जी छाणी द्वारा प्रदत्त दीक्षा परम्परा में अनेक विदुषी साध्वियों ने संयम का वरण किया, जिनमें हस्तिनापुर जम्बूद्वीप की संस्थापिका पूज्य गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी (जिन्होंने क्षुल्लिका दीक्षा इसी परम्परा में ली) प्रमुख हैं:
चातुर्मास विवरण (ऐतिहासिक अभिलेख)
| वर्ष | राज्य | जिला / नगर | चातुर्मास स्थल |
|---|---|---|---|
| 2000 | राजस्थान | सलूम्बर | सलूम्बर |
| 1999 | राजस्थान | उदयपुर | ऋषभदेव (धुलेव) |
| 1998 | राजस्थान | उदयपुर | ऋषभदेव |
| 1997 | गुजरात | साबरकांठा | तलोद |
| 1996 | पंजाब | अमृतसर | भिंडर |
| 1995 | राजस्थान | प्रतापगढ़ | पारसोला |