पंच महाव्रत
जैन धर्म में पंच महाव्रत का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
- अहिंसा - किसी भी जीव को पीड़ा न पहुंचाना
- सत्य - सदैव सत्य बोलना
- अस्तेय - चोरी न करना
- ब्रह्मचर्य - संयम
- अपरिग्रह - परिग्रह का त्याग
Jain Philosophy
जैन धर्म में पंच महाव्रत का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।