जैनामृत गुणस्थान शिविर Day-1 रामपुर मनिहारन, (सहारनपुर )

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03 Nov 2026 Admin

गुणस्थान – अध्ययन एवं पुनरावृत्ति

जैन धर्म शिक्षण शिविर

अध्ययन सामग्री एवं अभ्यास प्रश्नावली

सानिध्य : आचार्य गुरुदेव श्री भारत भूषण जी मुनिराज

भाग 1 – महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं परिभाषाएँ

1. गुणस्थान का अर्थ

गुण का अर्थ – परिणाम या भाव।

स्थान का अर्थ – जगह या अवस्था।

जीव के जैसे-जैसे भाव या परिणाम होते हैं, उसी के अनुसार जीव को वैसी अवस्था प्राप्त होती है। इस प्रकार कुल चौदह गुणस्थान होते हैं।

2. सम्यकदृष्टि का अर्थ

सम्यक का अर्थ – यथार्थ, सच्चा या वास्तविक।

दृष्टि का अर्थ – अभिप्राय, सोचने का नजरिया या दृष्टिकोण।

जिसका अभिप्राय यथार्थ और वास्तविक होता है, उसे सम्यकदृष्टि कहते हैं।

3. मिथ्यादृष्टि का अर्थ

जिसका अभिप्राय यथार्थ और वास्तविक नहीं होता तथा जिसका दृष्टिकोण सही नहीं होता, उसे मिथ्यादृष्टि कहते हैं।

4. सामान्य उदाहरण द्वारा समझिए

उदाहरण 1: यदि कोई व्यक्ति शराब को अच्छा मानता है और दूध को बुरा मानता है, तो उसका अभिप्राय यथार्थ नहीं है।

उदाहरण 2: यदि कोई व्यक्ति जहर को अच्छा और दूध को बुरा मानता है, तो उसका अभिप्राय भी यथार्थ नहीं है।

ध्यान दें – ये उदाहरण केवल सही और गलत अभिप्राय को समझाने के लिए दिए गए हैं। अब आगे सम्यक और मिथ्या देव, गुरु तथा शास्त्र के सिद्धांतिक उदाहरण समझिए।

भाग 2 – सम्यक एवं मिथ्या देव, गुरु और शास्त्र

जैन सिद्धांत में सम्यकदर्शन के विषय में देव, गुरु और धर्मशास्त्र की यथार्थ पहचान का विशेष महत्व है। इन्हें समझने के लिए निम्नलिखित उदाहरण देखिए।

अमृत के समान – सम्यक देव, गुरु और शास्त्र

1. सम्यक देव: वीतरागी जिनेन्द्र भगवान, जो राग-द्वेष से रहित और पूर्ण वीतराग हैं।

2. सम्यक गुरु: निर्ग्रन्थ दिगम्बर मुनिराज, जो परिग्रह का त्याग करके संयम एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर चलते हैं।

3. सम्यक शास्त्र: जिनवाणी, जो जिनेन्द्र भगवान के उपदेशों पर आधारित है तथा जीव को यथार्थ धर्म और मोक्षमार्ग का बोध कराती है।

समझिए: वीतरागी देव, निर्ग्रन्थ गुरु और जिनवाणी जीव के आध्यात्मिक हित तथा आत्मकल्याण के मार्ग के आधार हैं। इसलिए इन्हें अमृत के समान हितकारी उदाहरण से समझ सकते हैं।

विष के समान – मिथ्या देव, गुरु और शास्त्र

1. मिथ्या देव: राग-द्वेषयुक्त अर्थात वीतरागता से रहित कुदेव।

2. मिथ्या गुरु: मोह और परिग्रह में आसक्त तथा सच्चे आत्मकल्याण के मार्ग से हटाकर कुपथ की ओर ले जाने वाले कुगुरु।

3. मिथ्या शास्त्र: मिथ्या मान्यताओं का प्रतिपादन करने वाले तथा जीव को यथार्थ धर्म और मोक्षमार्ग से भटकाने वाले कुशास्त्र।

समझिए: जो मान्यताएँ जीव को यथार्थ धर्म से दूर करके मिथ्यामार्ग की ओर ले जाती हैं, वे आध्यात्मिक दृष्टि से अहितकारी हैं। इन्हें विष के समान उदाहरण से समझ सकते हैं।

अमृत और विष के उदाहरण से निष्कर्ष

जिस प्रकार अमृत हितकारी और विष अहितकारी होता है, उसी प्रकार सम्यक देव, सम्यक गुरु और सम्यक शास्त्र जीव के हितकारी आध्यात्मिक मार्ग के उदाहरण हैं, जबकि मिथ्या देव, मिथ्या गुरु और मिथ्या शास्त्र मिथ्यामार्ग के उदाहरण हैं।

याद रखने योग्य तीन बातें:
सम्यक देव – वीतरागी जिनेन्द्र भगवान।
सम्यक गुरु – निर्ग्रन्थ दिगम्बर मुनिराज।
सम्यक शास्त्र – जिनवाणी।

भाग 3 – चौदह गुणस्थानों के नाम

  1. मिथ्यात्व गुणस्थान
  2. सासादन गुणस्थान
  3. मिश्र गुणस्थान
  4. अविरत सम्यग्दृष्टि गुणस्थान
  5. देशविरत गुणस्थान
  6. प्रमत्तविरत गुणस्थान
  7. अप्रमत्तविरत गुणस्थान
  8. अपूर्वकरण गुणस्थान
  9. अनिवृत्तिकरण गुणस्थान
  10. सूक्ष्मसांपराय गुणस्थान
  11. उपशांतमोह गुणस्थान
  12. क्षीणमोह गुणस्थान
  13. सयोगकेवली गुणस्थान
  14. अयोगकेवली गुणस्थान

भाग 4 – अभ्यास के लिए 30 महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रत्येक प्रश्न के तीन विकल्प दिए गए हैं। सही विकल्प का चयन कीजिए।

प्रश्न 1. गुण का क्या अर्थ होता है?
A. जगह
B. परिणाम या भाव
C. शरीर
प्रश्न 2. स्थान का क्या अर्थ होता है?
A. जगह या अवस्था
B. परिणाम
C. अभिप्राय
प्रश्न 3. कुल कितने गुणस्थान होते हैं?
A. 12
B. 16
C. 14
प्रश्न 4. गुणस्थान किसे कहते हैं?
A. जीव के परिणामों के अनुसार प्राप्त अवस्था को
B. शरीर की अवस्था को
C. आयु के अनुसार प्राप्त अवस्था को
प्रश्न 5. सम्यक शब्द का अर्थ क्या है?
A. गलत
B. यथार्थ या वास्तविक
C. असत्य
प्रश्न 6. दृष्टि शब्द का अर्थ क्या है?
A. आँखों की रोशनी
B. देखने की शक्ति
C. अभिप्राय या नजरिया
प्रश्न 7. सम्यकदृष्टि किसे कहते हैं?
A. जिसका अभिप्राय यथार्थ हो
B. जिसका अभिप्राय गलत हो
C. जो किसी को न देखे
प्रश्न 8. मिथ्यादृष्टि किसे कहते हैं?
A. जिसका अभिप्राय वास्तविक हो
B. जिसका अभिप्राय यथार्थ न हो
C. जो हमेशा मौन रहे
प्रश्न 9. मिथ्यात्व गुणस्थान कौन-सा है?
A. पहला
B. दूसरा
C. तीसरा
प्रश्न 10. सासादन गुणस्थान कौन-सा है?
A. पहला
B. तीसरा
C. दूसरा
प्रश्न 11. मिश्र गुणस्थान कौन-सा है?
A. चौथा
B. तीसरा
C. दूसरा
प्रश्न 12. अविरत सम्यग्दृष्टि गुणस्थान कौन-सा है?
A. चौथा
B. पहला
C. दूसरा
प्रश्न 13. शराब को अच्छा और दूध को बुरा मानने वाले का अभिप्राय कैसा है?
A. यथार्थ
B. वास्तविक
C. यथार्थ नहीं
प्रश्न 14. जहर को अच्छा मानने वाले का अभिप्राय कैसा है?
A. यथार्थ नहीं
B. बिल्कुल सही
C. सम्यक
प्रश्न 15. सम्यकदृष्टि में किस प्रकार का अभिप्राय होता है?
A. काल्पनिक
B. वास्तविक
C. गलत
प्रश्न 16. मिथ्यादृष्टि में किस प्रकार का अभिप्राय होता है?
A. यथार्थ
B. वास्तविक
C. अयथार्थ
प्रश्न 17. गुणस्थान जीव के किस आधार पर निर्धारित होता है?
A. परिणाम या भाव के आधार पर
B. धन के आधार पर
C. उम्र के आधार पर
प्रश्न 18. पहला गुणस्थान कौन-सा है?
A. मिश्र
B. मिथ्यात्व
C. सासादन
प्रश्न 19. अंतिम गुणस्थान कौन-सा है?
A. सयोगकेवली
B. क्षीणमोह
C. अयोगकेवली
प्रश्न 20. सही और गलत अभिप्राय के आधार पर कौन-सी दो दृष्टियाँ बताई गई हैं?
A. सम्यकदृष्टि और मिथ्यादृष्टि
B. राग और द्वेष
C. सुख और दुःख
प्रश्न 21. सम्यक देव किसे माना जाता है?
A. राग-द्वेषयुक्त देव को
B. वीतरागी जिनेन्द्र भगवान को
C. परिग्रहधारी को
प्रश्न 22. सम्यक गुरु किसे माना जाता है?
A. मोही एवं परिग्रहधारी को
B. सांसारिक सुखों में आसक्त व्यक्ति को
C. निर्ग्रन्थ दिगम्बर मुनिराज को
प्रश्न 23. सम्यक शास्त्र किसे कहा जाता है?
A. जिनवाणी को
B. मिथ्या मान्यताओं वाले शास्त्र को
C. मनगढ़ंत विचारों को
प्रश्न 24. कुदेव किसे कहा जाता है?
A. वीतरागी जिनेन्द्र भगवान को
B. राग-द्वेषयुक्त देव को
C. निर्ग्रन्थ मुनिराज को
प्रश्न 25. कुगुरु किसे कहा जाता है?
A. निर्ग्रन्थ दिगम्बर मुनिराज को
B. वीतरागी गुरु को
C. मोही एवं परिग्रहधारी तथा कुपथ की ओर ले जाने वाले गुरु को
प्रश्न 26. कुशास्त्र किसे कहा जाता है?
A. मिथ्या मान्यताओं का प्रतिपादन करने वाले शास्त्र को
B. जिनवाणी को
C. मोक्षमार्ग का बोध कराने वाले शास्त्र को
प्रश्न 27. सम्यक देव, गुरु और शास्त्र को किसके समान हितकारी बताया गया है?
A. विष
B. अमृत
C. अग्नि
प्रश्न 28. मिथ्या देव, गुरु और शास्त्र को किसके समान अहितकारी बताया गया है?
A. अमृत
B. दूध
C. विष
प्रश्न 29. निम्नलिखित में से सम्यक देव, गुरु और शास्त्र का सही समूह कौन-सा है?
A. वीतरागी जिनेन्द्र भगवान, निर्ग्रन्थ दिगम्बर मुनिराज और जिनवाणी
B. रागी देव, परिग्रहधारी गुरु और कुशास्त्र
C. कुदेव, कुगुरु और कुशास्त्र
प्रश्न 30. मिथ्या देव, गुरु और शास्त्र जीव को किस ओर ले जाने वाले माने गए हैं?
A. मोक्षमार्ग की ओर
B. मिथ्यामार्ग और कुपथ की ओर
C. वीतरागता की ओर

विद्यार्थियों के लिए विशेष निर्देश

1. सभी चौदह गुणस्थानों के नाम याद करें।

2. गुण और स्थान का अर्थ अच्छी तरह समझें।

3. सम्यकदृष्टि एवं मिथ्यादृष्टि की परिभाषा याद करें।

4. सम्यक एवं मिथ्या देव, गुरु और शास्त्र के उदाहरण समझें।

5. अमृत और विष के उदाहरण का आध्यात्मिक आशय समझें।

6. सभी तीस प्रश्नों का अभ्यास स्वयं करें।

परीक्षा का समय – शाम 7:00 बजे

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