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जीव द्रव्य
अनन्तानन्त • असंख्यात प्रदेशी
जीव द्रव्य
अनन्तानन्त • असंख्यात प्रदेशीलक्षण: जिसमें दर्शन, ज्ञान रूप चेतना पाई जाती है, जो जीता था, जी रहा है और सदैव रहेगा।
भेद: मुक्त जीव (शुद्ध सिद्ध परमात्मा) और संसारी जीव (चारों गतियों में भ्रमण करने वाले जीव)।
उपकार: परस्परोपग्रहो जीवानाम्—जीव परस्पर एक-दूसरे के सहायक बनते हैं।